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ऋषि सुनक का जीवन परिचय - Rishi Sunak Biography In Hindi

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ऋषि सुनक का जीवन परिचय हाल ही में ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री लीज ट्रस के इस्तीफा देने के बाद ब्रिटेन के सांसद ऋषि सुनक को ब्रिटेन के प्रधानमंत्री के लिए सबसे आगे माना जा रहा था। उस समय से लेकर अब तक ऋषि सुनक खबरों में काफी ज्यादा छाए हुए थे। हालांकि अंततः खबर आई कि ऋषि सुनक का नाम ब्रिटेन के अगले प्रधानमंत्री के रूप में ऐलान हो चुका है। अब 28 अक्टूबर को उनका शपथ ग्रहण होने वाला है। इस तरह ऋषि सुनक भारत मूल के पहले व्यक्ति बन चूके हैं, जो ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बनने वाले हैं। जिस देश ने भारत पर 200 साल से भी ज्यादा शासन किया, आज उसी देश के सरकार के सर्वोत्तम पद को भारत मुल्क के ऋषि सुनक संभालेंगे, जो भारत के लिए बहुत ही सम्मान की बात है। यूनाइटेड किंगडम के साल 2015 के आम चुनाव में ऋषि ब्रिटेन के सांसद बने थे, उसके बाद 13 फरवरी 2020 को वित्त मंत्री के रूप में भी पद ग्रहण किए। इससे भी ज्यादा रोचक बात यह है कि ऋषि सुनक एक भारतीय अरबपति व्यवसाई और इंफोसिस के संस्थापक के दामाद भी है। ऋषि सुनक का ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बनने की जब प्रबल संभावना बताई जा रही थी तब से ही भारत में उत्साह देखन...

सरदार पूर्ण सिंह का जीवन परिचय - Sardar Puran Singh Biography In Hindi

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(जीवनकाल सन् 1881 ई० से 1931 ई०) सरदार पूर्णसिंह, द्विवेदी युग के श्रेष्ठ तथा सफल निबन्धकार हैं। अध्यापक पूर्णसिंह हिन्दी-गद्य साहित्य के प्रचार-प्रसार के अद्वितीय उत्थान के निबन्धकार हैं। उन्होंने भावात्मक एवं लाक्षणिक शैली के निबन्धों की रचना करके इस क्षेत्र में एक नयी परम्परा का सूत्रपात किया।  आपने मात्र छ: निबन्ध लिखकर ही हिन्दी के निबन्धकारों में अपना उच्चकोटि का स्थान बनाया। जीवन परिचय -  सरदार पूर्णसिंह का जन्म  सन् 1881 ई०  में ऐबटाबाद (पंजाब) जिले के सलहड़ नामक ग्राम में हुआ था।   अपनी माता के सात्विक और धर्मपरायण जीवन ने बालक पूर्णसिंह को अति प्रभावित किया। आपकी प्रारम्भिक शिक्षा  रावलपिण्डी  में हुई। हाईस्कूल करने के बाद आप  लाहौर  चले गए।  लाहौर से इण्टरमीडिएट-परीक्षा उत्तीर्ण करके आप रसायनशास्त्र का विशेष अध्ययन करने हेतु जापान चले गये। वहाॅं आपकी भेंट  स्वामी रामतीर्थ  से हुई। स्वामीजी से प्रभावित होकर आपने संन्यास ले लिया और उन्हीं के साथ  भारत  लौट आये। बाद में आपने अपनी गृहस्थी भी बसाई और देहरादून के...

पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी का जीवन परिचय - Padumlal Punnalal Bakshi Biography In Hindi

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(जीवनकाल सन् 1894-1971 ई०) जीवन परिचय -  पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी द्विवेदी युग के सुप्रसिद्ध साहित्यकार थे। उनकी प्रसिद्धि का प्रमुख आधार आलोचना और निबन्ध-लेखन था। विशेषत: ललित-निबन्धों के क्षेत्र में उन्हें अपार यश प्राप्त हुआ। एक गम्भीर विचारक, शिष्ट हास्य-व्यंग्यकार और कुशल आलोचक के रूप में बख्शीजी सदैव याद किए जाते रहेंगे। डॉ० राजेश्वरप्रसाद चतुर्वेदी के अनुसार, "बख्शीजी सरल और सात्त्विक विचारों के साहित्यकार हैं तथा उनकी साहित्य-साधना विविधरूपिणी भी है। वह खड़ीबोली के भावुक कवि, सुयोग्य सम्पादक, अध्ययनशील समीक्षक, प्रौढ़ निबन्धकार, समर्थ अनुवादक और एक कुशल कहानीकार के रूप में हमारे सामने आते हैं।" जीवन परिचय -  बख्शीजी का जन्म सन् 1894 ई० में छत्तीसगढ़ क्षेत्र के अन्तर्गत खैरागढ़ नामक स्थान पर हुआ था। इनके पिता का नाम उमराव और पितामह का नाम पुन्नालाल बख्शी था।  इनके पितामह और पिता दोनों ही साहित्यानुरागी थे और काव्य-रचना भी करते थे। इनकी माता के हृदय में भी साहित्य के लिए बहुत अनुराग था। इस प्रकार बख्शीजी का जन्म एक साहित्यिक परिवार में हुआ था और ऐसे परिवेश में ही उनक...

जयप्रकाश भारती का जीवन परिचय - Jaiprakash Bharti Biography In Hindi

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(जीवनकाल सन् 1936-2005 ई०) लोकप्रिय बाल-पत्रिका 'नन्दन' के यशस्वी सम्पादक जयप्रकाश भारती ने लेखन और पत्रकारिता दोनों ही क्षेत्रों में विशेष ख्याति अर्जित की। श्रेष्ठ बाल-साहित्य तथा साहित्यिक भाषा में वैज्ञानिक विषयों पर रचना-कार्य करने में ये सिद्धहस्त रहे हैं। इस दिशा में इन्होंने कई साहित्यिक अभावों की पूर्ति की। सरस एवं सरल भाषा में किसी भी गम्भीर विषय को बोधगम्य एवं रूचिप्रद बना देने की योग्यता के कारण इनका साहित्य अत्यन्त लोकप्रिय हुआ है। जीवन परिचय -  साहित्यिक शैली में रचित विविध वैज्ञानिक विषयों के लेखक और बाल-साहित्य के सफलतम साहित्यकार  जयप्रकाश भारती का जन्म सन् 1936 ई० में उत्तर प्रदेश के प्रमुख नगर मेरठ में हुआ था।  इनके पिता श्री रघुनाथ सहाय मेरठ के प्रसिद्ध एडवोकेट और कांग्रेस के सक्रिय कार्यकर्ता रहे हैं। भारतीजी ने  बी०एस-सी०  तक की शिक्षा मेरठ में ही पूरी की। छात्र-जीवन में इन्होंने अपने पिता को अनेक प्रकार की सामाजिक गतिविधियों में संलग्न देखा; अत: स्वाभाविक रूप से इन पर अपने पिता का व्यापक प्रभाव पड़ा। परिणामस्वरूप जयप्रकाश भारती जी ने समाजस...

श्याम सुन्दर दास का जीवन परिचय - Shyam Sundar Das Biography In Hindi

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(जीवनकाल सन् 1875 ई० से 1945 ई०)   डॉ० श्यामसुन्दर दास हिन्दी साहित्याकाश के ऐसे नक्षत्र हैं, जिन्होंने अपने प्रकाश से साहित्य को उज्जवल कर दिया। द्विवेदी युग के विषयों के विवेचन का कार्य सर्वप्रथम बाबू श्यामसुन्दरदास जी ने आरम्भ किया। आपने हिन्दी साहित्य के विकास में अतुलनीय योगदान दिया। आप द्विवेदी युग के श्रेष्ठ निबन्धकार थे। जीवन परिचय -  डॉ० श्यामसुन्दर दास का जन्म काशी के एक पंजाबी खत्री परिवार में  सन् 1875 ई०  को हुआ था।   इनके पिताजी का नाम  श्री देवीदास खन्ना  था।  इन्होंने  प्रयाग विश्वविद्यालय  से  बी० ए०  की परीक्षा उत्तीर्ण की।  बी० ए०  उत्तीर्ण करने के बाद इन्हें  सेण्ट्रल हिन्दू विश्वविद्यालय  में अध्यापक के पद पर नियुक्त किया गया। तत्पश्चात् इनकी नियुक्ति लखनऊ के कालीचरण हाईस्कूल में प्रधानाचार्य के पद पर हुई। इन्हीं दिनों  काशी हिन्दू विश्वविद्यालय  में हिन्दी विभाग की स्थापना हुई तथा इन्होंने वहाॅं अध्यक्ष का पदभार सॅंभाला। काशी नागरी प्रचारिणी सभा  की स्थापना में इन्होंने स...

प्रो. जी. सुन्दर रेड्डी का जीवन परिचय - Pro Ji Sundar Reddy Biography In Hindi

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(जीवनकाल सन् 1919 ई॰ से सन् 2005 ई॰) प्रो. जी. सुन्दर रेड्डी एक सर्वश्रेष्ठ बेचारा सम आलोचक एवं निबन्धकार हैं। आप दक्षिण भारतीय हिन्दी विद्यमान है। आपका व्यक्तित्व एवं कृतित्व अति प्रभावशाली है। श्री रेड्डी की हिन्दी साहित्य सेवा साधना एवं निष्ठा सराहनीय है। आपने हिन्दी और तेलुगु साहित्य की तुलनात्मक अध्ययन पर प्रभुत्व कार्य किया है। हिन्दी को विकसित तथा प्रगतिशाली बनाने के लिए साहित्य में आपका योगदान सराहनीय है आपकी भाषा शैली किसी भी हिन्दी लेखक के समतुल्य रखी जा सकती है। जीवन परिचय- प्रो. जी. सुन्दर रेड्डी का जन्म 10 अप्रैल सन् 1919 ई॰ में दक्षिण भारत में हुआ था। हिन्दी के अतिरिक्त आपका अधिकार तमिल तथा मलयालम भाषा ऊपर भी था। आपने 32 वर्षों से भी अधिक समय तक आंध्र विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग अध्यक्ष पद को सुशोभित किया। आपने हिन्दी और तेलुगु साहित्य की तुलनात्मक अध्ययन पर काफी कार्य किया है। आपकी अनेक निबन्ध हिन्दी अंग्रेजी एवं तेलुगु पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए हैं। तेलुगु भाषी होते हुए भी हिन्दी भाषा में रचना करके आपने एक प्रोत्साहन एवं प्रेरणादाई उदाहरण प्रस्तुत किया है। आप...

गिरिजा कुमार माथुर का जीवन परिचय - Girija Kumar Mathur Biography In Hindi

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(जीवनकाल सन् 1919 ई॰ से सन् 1994 ई॰) जीवन परिचय -  गिरिजाकुमार माथुर का जन्म अशोकनगर मध्य प्रदेश नामक स्थान पर सन 1919 ई॰ में श्री देवी शरण किया हुआ था। आप की प्रारम्भिक शिक्षा घर पर ही हुई। इसके बाद सन 1934 ई॰ में अपने हाईस्कूल परीक्षा झांसी से उत्तीर्ण की। इसके बाद लखनऊ विश्वविद्यालय से आपने अंग्रेजी साहित्य में एम ए तथा एलएलबी की परीक्षा उत्तीर्ण की। प्रसिद्ध कवित्री शकुंत माथुर से आप का विवाह हुआ। कुछ समय बाद उन्हें दिल्ली सचिवालय में नौकरी मिल गई। इसके बाद ऑल इंडिया रेडियो में कार्य किया फुल आकाशवाणी छोड़कर संयुक्त राष्ट्र अमेरिका चली गई। वहाॅं 2 वर्ष कार्य करने की बाद 1943 ई॰ में आकाशवाणी लखनऊ में उप निदेशक के रूप में आप पुनः नियुक्त हुए। कृतित्व एवं व्यक्तित्व श्री गिरिजाकुमार माथुर की रचनाएं इस प्रकार हैं- काव्य- मंजिल नाश और निर्माण धूप के धान सिला पंख चमकीले जो बांध नहीं सका आदि। आपने एकाकी नाटक आलोचना आदि का भी श्रजन किया। गिरिजाकुमार माथुर उत्तर छायावादी संस्कारों से प्रारंभ होकर अप्रतिबंध सामाजिकता एवं प्रयोग धार्मिकता से निकलकर नई कविता की जीवंतता एवं सामर्थ्य से...

जैनेंद्र कुमार का जीवन परिचय - Jainendra Kumar Biography In Hindi

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जैनेंद्र कुमार का जीवन परिचय जीवन परिचय - प्रसिध्द विचारक, उपन्यासकार, कथाकार और निबन्धकार श्री जैनेन्द्र कुमार का जन्म सन्   1905 ई॰  में जिला अलीगढ़ के  कौड़ियागंज  नामक स्थान में हुआ था। इनके पिता का नाम  श्री  प्यारेलाल  और माता का नाम  श्रीमती रामदेवी  था। जैनेन्द्रजी के जन्म के दो वर्ष पश्चात् ही इनके पिता की मृत्यु हो गई। माता एवं मामा ने इनका पालन-पोषण किया। इनकी प्रारम्भिक शिक्षा जैन गुरूकुल, हस्तिनापुर में हुई। इनका नामकरण भी इसी संस्था में हुआ। आरम्भ में इनका नाम  आनन्दीलाल  था, किन्तु जब जैन गुरुकुल में अध्ययन के लिए इनका नाम लिखवाया गया, तब इनका नाम जैनेन्द्र कुमार रख दिया गया। सन् 1912 ई॰ में इन्होंने गुरूकुल छोड़ दिया। सन् 1919 ई॰ में इन्होंने मैट्रिक की परीक्षा पंजाब से उत्तीर्ण की। इनकी उच्च शिक्षा 'काशी हिन्दु विश्वविद्यालय' में हुई। सन् 1921 ई॰ में इन्होंने विश्वविद्यालय की पढ़ाई छोड़ दी और असहयोग आन्दोलन में सक्रिय हो गए। सन् 1921 ई॰ से 1923 ई॰ के बीच जैनेन्द्रजी ने अपनी माता की सहायता से व्यापार किया, जिसमें इन...

रामनरेश त्रिपाठी का जीवन परिचय - Ramnaresh Tripathi Biography In Hindi

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   रामनरेश त्रिपाठी का जीवन परिचय जीवन परिचय -- रामनरेश त्रिपाठी का खड़ीबोली काव्य में अत्यन्त महत्वपूर्ण स्थान है। इन्होंने कई दृष्टियों से हिन्दी-साहित्य को अतुलनीय समृध्दि प्रदान की है। राष्ट्रीय भावनाओं पर आधारित इनका काव्य अत्यन्त ह्रदयस्पर्शी है। राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त के अनुसार, "पं॰ रामनरेश त्रिपाठीजी मननशील, विद्वान्, परिश्रमी, लोक-साहित्य के धनी थे। इन्होंने अपनी रचनाओं में राष्ट्रप्रेम, मानव-सेवा, पवित्र प्रेम का नवीन आदर्श उत्पन्न किया है।" कविता का आदर्श और सूक्ष्म सौन्दर्य एक साथ चित्रित करनेवाले कवि, रामनरेश त्रिपाठी का जन्म सन् 1889 ई॰ में जिला जौनपुर के अन्तर्गत कोइरीपुर ग्राम के एक साधारण कृषक परिवार में हुआ था। इनके पिता पं॰ रामदत्त त्रिपाठी एक ईश्वरभक्त ब्राह्मण थे। इन्होंने केवल नवीं कक्षा तक ही विद्यालय में शिक्षा प्राप्त की, बाद में स्वतन्त्र रूप से अध्ययन किया तथा साहित्य-सेवा को अपने जीवन का लक्ष्य बनाया। इनको केवल हिन्दी ही नहीं, वरन् संस्कृत, बाँग्ला और गुजराती भाषाओं का भी अच्छा ज्ञान था। त्रिपाठीजी 'हिन्दी-साहित्य सम्मेलन, प्रया...

सुभद्राकुमारी चौहान का जीवन परिचय - Subhadra Kumari Chauhan Biography In Hindi

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सुभद्राकुमारी चौहान का जीवन परिचय जीवन परिचय -- सुभद्राकुमारी चौहान की कविताओं में सच्ची वीरांगना का ओज और शौर्य प्रकट हुआ है। हिन्दी-काव्य-जगत् में सुभद्राजी अकेली ऐसी कवयित्री हैं, जिन्होंने अपने कण्ठ की पुकार से लाखों भारतीय युवक-युवतियों को युग-युग की अकर्मण्य उदासी को त्यागकर स्वतन्त्रता-संग्राम में स्वयं को समर्पित कर देने के लिए प्रेरित किया।.         डॉ॰ राजेश्वरप्रसाद ने सुभद्राकुमारी चौहान और उनके काव्य के सन्दर्भ में लिखा है,   "आधुनिककालीन कवयित्रियों में सुभद्राजी का प्रमुख स्थान है। उनकी 'झाँसी की रानी' शीर्षक कविता सर्वाधिक लोकप्रिय है और उसे जो प्रसिध्दि प्राप्त हुई, वह कई बड़े-बड़े महाकाव्यों को भी प्राप्त न हो सकी।" स्वतन्त्रता-संग्राम की सक्रिय सेनानी, राष्ट्रीय चेतना की अमर गायिका तथा वीर रस की एकमात्र हिन्दी कवयित्री श्रीमती सुभद्राकुमारी चौहान का जन्म सन् 1904 ई॰ में इलाहाबाद के एक सम्पन्न परिवार में हुआ था। ये प्रयाग के 'क्रॉस्थवेट गर्ल्स कॉलेज' की छात्रा थीं। 15 वर्ष की अवस्था में इनका विवाह खण्डवा (म॰ प्र॰) के ठाकुर लक...

पंडित प्रताप नारायण मिश्र का जीवन परिचय - Pandit Pratap Narayan Mishra Biography In Hindi

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पं॰ प्रतापनारायण मिश्र का जीवन परिचय  जीवन परिचय -- आधुनिक हिन्दी निर्माताओं की वृहत्त्रयी में भारतेन्दु हरिश्चन्द्र, बालकृष्ण भट्ट और प्रतापनारायण मिश्र की गणना होती है। भारतेन्दु युग के देदीप्यमान नक्षत्र पं॰ प्रतापनारायण मिश्र का जन्म सन् 1856 ई॰ में उन्नाव जनपद के बैजे नामक ग्राम में हुआ था। आपके पिता पं॰ संकटाप्रसाद एक प्रसिध्द ज्योतिषाचार्य थे। वे ज्योतिष विद्या के माध्यम से ही उन्नाव से कानपुर आकर बस गये थे। यहीं पर उनकी शिक्षा-दीक्षा हुई। इनके पिता इन्हें ज्योतिष पढ़ाकर पैतृक व्यवसाय में लगाना चाहते थे, किन्तु स्वभाव चंचल और मनमौजी होने के कारण आपका ध्यान ज्योतिषपठन में नहीं रमा। स्वाध्याय से ही मिश्र जी ने संस्कृत, उर्दू, हिन्दी, फारसी, बाँग्ला और अँग्रजी आदि भाषाओं पर अच्छा अधिकार कर लिया। भारतेन्दु युग हिन्दी साहित्य का उदय काल है। भारतेन्दु जी की 'कविवचन-सुधा' पत्रिका का विशेष प्रभाव पड़ा और वहीं से आपने कविता लिखना प्रारम्भ कर दिया। बाद में गद्य के क्षेत्र में आ गये। भारतेन्दु उनके आदर्श थे। मिश्र जी ने उन्हीं जैसी व्यावहारिक शैली अपनायी। उन दिनों लावनियों...

मीराबाई का जीवन परिचय - Meera Bai Biography In Hindi

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                      मीराबाई का जीवन परिचय  जीवन परिचय -- मीराबाई का जन्म सन् 1498 ई॰ में राजस्थान में मेड़ता के पास चौकड़ी नामक ग्राम में हुआ था। ये जोधपुर के संस्थापक राव जोधाजी की प्रपौत्री एवं जोधपुर-नरेश रत्न सिंह की पुत्री थीं। बचपन में ही इनकी माता का स्वर्गवास हो जाने से इनका पालन-पोषण दादा की देख-रेख में शान-शौकत के साथ हुआ। इनके दादा राव दूदाजी बड़े धार्मिक स्वभाव के थे; अत: मीरा के जीवन पर इसका सीधा प्रभाव पड़ा। जब मीरा मात्र आठ वर्ष की थीं, तभी उन्होंने कृष्ण को अपने पतिरूप में मन में स्वीकार कर लिया। मीरा का विवाहा चित्तौड़ के महाराणा सांगा के सबसे बड़े पुत्र भोजराज के साथ हुआ था। विवाहा के कुछ समय बाद ही इनके पति की असामयिक मृत्यु हो गयी। इसका मीरा के जीवन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा, क्योंकि वह तो पहले से ही भगवान् कृष्ण को अपने पतिरूप में स्वीकार कर चुकी थीं। वे सदैव श्रीकृष्ण के चरणों में अपना ध्यान केन्द्रित रखती थीं। मीरा के इस कार्य से परिवार के लोग नाराज रहते थे, क्योंकि उनका यह कार्य राजघराने की प्रतिष्ठा ...

अयोध्या सिंह उपाध्याय 'हरिऔध' का जीवन परिचय - Ayodhya Singh Upadhyay Hariaudh Biography In Hindi

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(जीवनकाल सन् 1865 ई॰ से सन् 1947 ई॰) अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध जी द्विवेदी युग के प्रमुख कवि थे। इन्होंने आधुनिक खड़ीबोली के काव्य-क्षेत्र को अपनी मौलिक प्रतिभा के आधार पर समृध्द बनाया। हरिऔधजी ने प्राचीन विषयों, छन्दों तथा काव्य के अन्तरंग और बहिरंग पक्षों पर नवीन युग की उभरती हुई मान्यताओं की रंग-भरी तूलिका फेरी। इनकी काव्यधारा; युग की परम्पराओं एवं मान्यताओं को यथार्थ रूप में लेकर प्रवाहित हुई है। इस दृष्टि से आधुनिक कविता का सर्वप्रथम प्रगतिशील कवि हरिऔधजी को कहा जाए तो अतिशयोक्ति न होगी। जीवन परिचय -  अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध जी का जन्म आजमगढ़ जिले के निजामाबाद गाँव में सन् 1865 ई॰ (संवत् 1922) में हुआ था। इनके पिता का नाम पं॰ भोलासिंह और माता का नाम रुक्मिणी देवी था। इनके पूर्वज शुक्ल-यजुर्वेदी सनाढ्य ब्राह्मण थे, जो कालान्तर में सिक्ख हो गए थे। मिडिल परीक्षा उत्तीर्ण करने के पश्चात् इन्होंने काशी के क्वीन्स कॉलेज में प्रवेश लिया, किन्तु अस्वस्थता के कारण इन्हें बीच में ही अपना विद्यालयीय अध्ययन छोड़ देना पड़ा। तत्पश्चात् इन्होंने घर पर ही फारसी, अंग्रेजी, और संस्कृत भाषा...

सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ का जीवन परिचय - Sachidanand Hiranand Vatsyayan Agay Biography In Hindi

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अज्ञेयजी का जीवन परिचय  जीवन परिचय -  बहुमुखी प्रतिभासम्पन्न साहित्यकार अज्ञेयजी का जन्म पंजाब प्रान्त के करतारपुर (जालन्धर) नगर में सन् 1911 ई॰ में हुआ था। इनके पिता का नाम श्री हीरानन्द शास्त्री था। ये मूलत: भणोत सारस्वत ब्राह्मण कुल के थे, लेकिन जातीय संकीर्णता को दूर करने के लिए इन्होंने अपने नाम के साथ 'वात्स्यायन' लिखना आरम्भ किया। अज्ञेयजी की प्रारम्भिक शिक्षा घर पर ही सम्पन्न हुई। तत्पश्चात् इन्होंने फारसी और अंग्रेजी पढ़ी। इनकी उच्च शिक्षा मद्रास (चेन्नई) और लाहौर (अब पाकिस्तान में) में हुई। सन् 1929 ई॰ में विज्ञान स्नातक होने के बाद ये अंग्रेजी साहित्य में एम॰ ए॰ कर रहे थे कि इन्हें क्रान्तिकारी आन्दोलन में भाग लेने के कारण जेल में बन्द कर दिया गया। सन् 1930 ई॰ से 1934 ई॰ तक ये जेल में रहे और वहीं लेखन-कार्य करते रहे। इनका 'अज्ञेय' नाम जेल में ही रखा गया। सन् 1955 ई॰ में ये यूनेस्को द्वारा प्रदत्त स्कॉलरशिप प्राप्त कर यूरोप गए। सन् 1957 ई॰ में इन्होंने जापान और पूर्वी एशिया का भ्रमण किया। कुछ समय तक ये अमेरिका में 'भारतीय साहित्य और संस्कृति...