Posts

प्रो. जी. सुन्दर रेड्डी का जीवन परिचय - Pro Ji Sundar Reddy Biography In Hindi

Image
(जीवनकाल सन् 1919 ई॰ से सन् 2005 ई॰) प्रो. जी. सुन्दर रेड्डी एक सर्वश्रेष्ठ बेचारा सम आलोचक एवं निबन्धकार हैं। आप दक्षिण भारतीय हिन्दी विद्यमान है। आपका व्यक्तित्व एवं कृतित्व अति प्रभावशाली है। श्री रेड्डी की हिन्दी साहित्य सेवा साधना एवं निष्ठा सराहनीय है। आपने हिन्दी और तेलुगु साहित्य की तुलनात्मक अध्ययन पर प्रभुत्व कार्य किया है। हिन्दी को विकसित तथा प्रगतिशाली बनाने के लिए साहित्य में आपका योगदान सराहनीय है आपकी भाषा शैली किसी भी हिन्दी लेखक के समतुल्य रखी जा सकती है। जीवन परिचय- प्रो. जी. सुन्दर रेड्डी का जन्म 10 अप्रैल सन् 1919 ई॰ में दक्षिण भारत में हुआ था। हिन्दी के अतिरिक्त आपका अधिकार तमिल तथा मलयालम भाषा ऊपर भी था। आपने 32 वर्षों से भी अधिक समय तक आंध्र विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग अध्यक्ष पद को सुशोभित किया। आपने हिन्दी और तेलुगु साहित्य की तुलनात्मक अध्ययन पर काफी कार्य किया है। आपकी अनेक निबन्ध हिन्दी अंग्रेजी एवं तेलुगु पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए हैं। तेलुगु भाषी होते हुए भी हिन्दी भाषा में रचना करके आपने एक प्रोत्साहन एवं प्रेरणादाई उदाहरण प्रस्तुत किया है। आप...

गिरिजा कुमार माथुर का जीवन परिचय - Girija Kumar Mathur Biography In Hindi

Image
(जीवनकाल सन् 1919 ई॰ से सन् 1994 ई॰) जीवन परिचय -  गिरिजाकुमार माथुर का जन्म अशोकनगर मध्य प्रदेश नामक स्थान पर सन 1919 ई॰ में श्री देवी शरण किया हुआ था। आप की प्रारम्भिक शिक्षा घर पर ही हुई। इसके बाद सन 1934 ई॰ में अपने हाईस्कूल परीक्षा झांसी से उत्तीर्ण की। इसके बाद लखनऊ विश्वविद्यालय से आपने अंग्रेजी साहित्य में एम ए तथा एलएलबी की परीक्षा उत्तीर्ण की। प्रसिद्ध कवित्री शकुंत माथुर से आप का विवाह हुआ। कुछ समय बाद उन्हें दिल्ली सचिवालय में नौकरी मिल गई। इसके बाद ऑल इंडिया रेडियो में कार्य किया फुल आकाशवाणी छोड़कर संयुक्त राष्ट्र अमेरिका चली गई। वहाॅं 2 वर्ष कार्य करने की बाद 1943 ई॰ में आकाशवाणी लखनऊ में उप निदेशक के रूप में आप पुनः नियुक्त हुए। कृतित्व एवं व्यक्तित्व श्री गिरिजाकुमार माथुर की रचनाएं इस प्रकार हैं- काव्य- मंजिल नाश और निर्माण धूप के धान सिला पंख चमकीले जो बांध नहीं सका आदि। आपने एकाकी नाटक आलोचना आदि का भी श्रजन किया। गिरिजाकुमार माथुर उत्तर छायावादी संस्कारों से प्रारंभ होकर अप्रतिबंध सामाजिकता एवं प्रयोग धार्मिकता से निकलकर नई कविता की जीवंतता एवं सामर्थ्य से...

जैनेंद्र कुमार का जीवन परिचय - Jainendra Kumar Biography In Hindi

Image
जैनेंद्र कुमार का जीवन परिचय जीवन परिचय - प्रसिध्द विचारक, उपन्यासकार, कथाकार और निबन्धकार श्री जैनेन्द्र कुमार का जन्म सन्   1905 ई॰  में जिला अलीगढ़ के  कौड़ियागंज  नामक स्थान में हुआ था। इनके पिता का नाम  श्री  प्यारेलाल  और माता का नाम  श्रीमती रामदेवी  था। जैनेन्द्रजी के जन्म के दो वर्ष पश्चात् ही इनके पिता की मृत्यु हो गई। माता एवं मामा ने इनका पालन-पोषण किया। इनकी प्रारम्भिक शिक्षा जैन गुरूकुल, हस्तिनापुर में हुई। इनका नामकरण भी इसी संस्था में हुआ। आरम्भ में इनका नाम  आनन्दीलाल  था, किन्तु जब जैन गुरुकुल में अध्ययन के लिए इनका नाम लिखवाया गया, तब इनका नाम जैनेन्द्र कुमार रख दिया गया। सन् 1912 ई॰ में इन्होंने गुरूकुल छोड़ दिया। सन् 1919 ई॰ में इन्होंने मैट्रिक की परीक्षा पंजाब से उत्तीर्ण की। इनकी उच्च शिक्षा 'काशी हिन्दु विश्वविद्यालय' में हुई। सन् 1921 ई॰ में इन्होंने विश्वविद्यालय की पढ़ाई छोड़ दी और असहयोग आन्दोलन में सक्रिय हो गए। सन् 1921 ई॰ से 1923 ई॰ के बीच जैनेन्द्रजी ने अपनी माता की सहायता से व्यापार किया, जिसमें इन...

रामनरेश त्रिपाठी का जीवन परिचय - Ramnaresh Tripathi Biography In Hindi

Image
   रामनरेश त्रिपाठी का जीवन परिचय जीवन परिचय -- रामनरेश त्रिपाठी का खड़ीबोली काव्य में अत्यन्त महत्वपूर्ण स्थान है। इन्होंने कई दृष्टियों से हिन्दी-साहित्य को अतुलनीय समृध्दि प्रदान की है। राष्ट्रीय भावनाओं पर आधारित इनका काव्य अत्यन्त ह्रदयस्पर्शी है। राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त के अनुसार, "पं॰ रामनरेश त्रिपाठीजी मननशील, विद्वान्, परिश्रमी, लोक-साहित्य के धनी थे। इन्होंने अपनी रचनाओं में राष्ट्रप्रेम, मानव-सेवा, पवित्र प्रेम का नवीन आदर्श उत्पन्न किया है।" कविता का आदर्श और सूक्ष्म सौन्दर्य एक साथ चित्रित करनेवाले कवि, रामनरेश त्रिपाठी का जन्म सन् 1889 ई॰ में जिला जौनपुर के अन्तर्गत कोइरीपुर ग्राम के एक साधारण कृषक परिवार में हुआ था। इनके पिता पं॰ रामदत्त त्रिपाठी एक ईश्वरभक्त ब्राह्मण थे। इन्होंने केवल नवीं कक्षा तक ही विद्यालय में शिक्षा प्राप्त की, बाद में स्वतन्त्र रूप से अध्ययन किया तथा साहित्य-सेवा को अपने जीवन का लक्ष्य बनाया। इनको केवल हिन्दी ही नहीं, वरन् संस्कृत, बाँग्ला और गुजराती भाषाओं का भी अच्छा ज्ञान था। त्रिपाठीजी 'हिन्दी-साहित्य सम्मेलन, प्रया...

सुभद्राकुमारी चौहान का जीवन परिचय - Subhadra Kumari Chauhan Biography In Hindi

Image
सुभद्राकुमारी चौहान का जीवन परिचय जीवन परिचय -- सुभद्राकुमारी चौहान की कविताओं में सच्ची वीरांगना का ओज और शौर्य प्रकट हुआ है। हिन्दी-काव्य-जगत् में सुभद्राजी अकेली ऐसी कवयित्री हैं, जिन्होंने अपने कण्ठ की पुकार से लाखों भारतीय युवक-युवतियों को युग-युग की अकर्मण्य उदासी को त्यागकर स्वतन्त्रता-संग्राम में स्वयं को समर्पित कर देने के लिए प्रेरित किया।.         डॉ॰ राजेश्वरप्रसाद ने सुभद्राकुमारी चौहान और उनके काव्य के सन्दर्भ में लिखा है,   "आधुनिककालीन कवयित्रियों में सुभद्राजी का प्रमुख स्थान है। उनकी 'झाँसी की रानी' शीर्षक कविता सर्वाधिक लोकप्रिय है और उसे जो प्रसिध्दि प्राप्त हुई, वह कई बड़े-बड़े महाकाव्यों को भी प्राप्त न हो सकी।" स्वतन्त्रता-संग्राम की सक्रिय सेनानी, राष्ट्रीय चेतना की अमर गायिका तथा वीर रस की एकमात्र हिन्दी कवयित्री श्रीमती सुभद्राकुमारी चौहान का जन्म सन् 1904 ई॰ में इलाहाबाद के एक सम्पन्न परिवार में हुआ था। ये प्रयाग के 'क्रॉस्थवेट गर्ल्स कॉलेज' की छात्रा थीं। 15 वर्ष की अवस्था में इनका विवाह खण्डवा (म॰ प्र॰) के ठाकुर लक...

पंडित प्रताप नारायण मिश्र का जीवन परिचय - Pandit Pratap Narayan Mishra Biography In Hindi

Image
पं॰ प्रतापनारायण मिश्र का जीवन परिचय  जीवन परिचय -- आधुनिक हिन्दी निर्माताओं की वृहत्त्रयी में भारतेन्दु हरिश्चन्द्र, बालकृष्ण भट्ट और प्रतापनारायण मिश्र की गणना होती है। भारतेन्दु युग के देदीप्यमान नक्षत्र पं॰ प्रतापनारायण मिश्र का जन्म सन् 1856 ई॰ में उन्नाव जनपद के बैजे नामक ग्राम में हुआ था। आपके पिता पं॰ संकटाप्रसाद एक प्रसिध्द ज्योतिषाचार्य थे। वे ज्योतिष विद्या के माध्यम से ही उन्नाव से कानपुर आकर बस गये थे। यहीं पर उनकी शिक्षा-दीक्षा हुई। इनके पिता इन्हें ज्योतिष पढ़ाकर पैतृक व्यवसाय में लगाना चाहते थे, किन्तु स्वभाव चंचल और मनमौजी होने के कारण आपका ध्यान ज्योतिषपठन में नहीं रमा। स्वाध्याय से ही मिश्र जी ने संस्कृत, उर्दू, हिन्दी, फारसी, बाँग्ला और अँग्रजी आदि भाषाओं पर अच्छा अधिकार कर लिया। भारतेन्दु युग हिन्दी साहित्य का उदय काल है। भारतेन्दु जी की 'कविवचन-सुधा' पत्रिका का विशेष प्रभाव पड़ा और वहीं से आपने कविता लिखना प्रारम्भ कर दिया। बाद में गद्य के क्षेत्र में आ गये। भारतेन्दु उनके आदर्श थे। मिश्र जी ने उन्हीं जैसी व्यावहारिक शैली अपनायी। उन दिनों लावनियों...

मीराबाई का जीवन परिचय - Meera Bai Biography In Hindi

Image
                      मीराबाई का जीवन परिचय  जीवन परिचय -- मीराबाई का जन्म सन् 1498 ई॰ में राजस्थान में मेड़ता के पास चौकड़ी नामक ग्राम में हुआ था। ये जोधपुर के संस्थापक राव जोधाजी की प्रपौत्री एवं जोधपुर-नरेश रत्न सिंह की पुत्री थीं। बचपन में ही इनकी माता का स्वर्गवास हो जाने से इनका पालन-पोषण दादा की देख-रेख में शान-शौकत के साथ हुआ। इनके दादा राव दूदाजी बड़े धार्मिक स्वभाव के थे; अत: मीरा के जीवन पर इसका सीधा प्रभाव पड़ा। जब मीरा मात्र आठ वर्ष की थीं, तभी उन्होंने कृष्ण को अपने पतिरूप में मन में स्वीकार कर लिया। मीरा का विवाहा चित्तौड़ के महाराणा सांगा के सबसे बड़े पुत्र भोजराज के साथ हुआ था। विवाहा के कुछ समय बाद ही इनके पति की असामयिक मृत्यु हो गयी। इसका मीरा के जीवन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा, क्योंकि वह तो पहले से ही भगवान् कृष्ण को अपने पतिरूप में स्वीकार कर चुकी थीं। वे सदैव श्रीकृष्ण के चरणों में अपना ध्यान केन्द्रित रखती थीं। मीरा के इस कार्य से परिवार के लोग नाराज रहते थे, क्योंकि उनका यह कार्य राजघराने की प्रतिष्ठा ...